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रविवार, 13 जुलाई 2014

दिल्ली में बिजली गुल  !!

इन दिनों दिल्ली जिस कदर बिजली की किल्लत से जूझ रही है शायद अतीत में दिल्ली के लोगों को इतने बुरे हलात से शायद ही रूबरू हुए होंगे। इसकेलिए केजरीवाल तो मुख्य दोषी है जबकि बची -खुची कसर देश के तत्कालीन सरकार पूरी कर दिए। दरअसल में दिल्ली का इनदिनों सुध लेनेवाला  कोई नहीं है केजरीवाल का केजरी नाच का स्वाहा हो चूका है और उनके द्वारा किये गए करवाई का ही खीश कहिये जो इनदिनों बिजली कंपनी दिल्लीवासीयों पर निकाल रहे है।  अतीत में एक घंटे की कटौती के जगह इनदिनों ६ से ८ घंटे बेझिझक कटौती कर रही है।

वास्तविक में दिल्ली के उपराज्यपाल हो अथवा केंद्रीय बिजली मंत्री के पास इतनी फुरसत कँहा कि दिल्ली वालों का खबर लें, जब जनप्रतिनिधि ही जनता के प्रति उदासीनता दिखा रहे हो तो ऐसे में बिजली कंपनी के सर्वोचय पदो पर विराजमान महानुभाव व सरकारी दफ्तर का शोभा बढ़ा रहे बाबुओं उनको किस बात का फिक्र होगा। अन्तः जनता फिरसे खुदको कोस रही है इसका परिणाम कितना गंभीर होता है यह सचमुच कांग्रेस पार्टी भलीभांति जान चुकी है और इनदिनों सत्ता पर आसीन पार्टी को भी जान लेनी चाहिए अन्यथा जनता प्रायश्चित करने के लिए भी नहीं छोड़ती जैसा कि हालमें  केजरीवाल का किया है।

बरहाल मोदी और उनकी सरकार कितना भी पीठ क्यूँ न थपथपा ले परन्तु हक़ीक़त लोगों के समझ से परे है।  जबकि बिजली मंत्री बड़बोलेपण ही कहा जायेगा, जो देश के लोगों को बिजली की समस्या से निजात दिलाने की बात कहते अथवा अस्वासन देते फिरते है यद्दीप दिल्ली जैसी छोटी राज्य में बिजली की समस्या को  दुरुस्त करने के लिए अभी तक सामने भी नहीं आये और न ही उनके तरफ से कोई कारगर कदम उठाये गए मसलन दिल्ली के अधिकाधिक लोग असंतुष्ट और आशाविहीन है और उनके संजीदा को लेकर असमंजस है। अन्तोगत्वा इसका परिणाम सकारात्मक हरगिज़ नहीं होगा और अच्छे दिन की बात करने के वजाय प्रतिबद्धता के साथ प्रत्यनशील होना चाहिए ताकि दिल्ली की बिजली की समस्या का हल निकाल कर दिल्लीवासियों को बिजली की किल्लत से राहत मिलें।

शनिवार, 12 जुलाई 2014


 बावन, कुकुर, हाथी अपने ज़ात केर खाती!!

वाकये ई कहावत यथार्थ अछि, आई जे ब्राह्मण के हाल अछि ओकरा लेल ब्राह्मण स्वंय जिम्मेवार अछि।  कारन जे आइयो ब्राह्मण प्रबुद्धता और विलक्षणता  म  इस्वर के कृपा से जन्मजात अव्वल प्राप्त होयत अछि लेकिन सदैव कनि व तनिक लाभ के लेल ओकर दुरपयोग करैत म अगुआ नतीजा आई हास्य पर अछि।  देश में जतेक जाति आओर वर्ग छैक ओकर समुदाय में कोनो -कोनो संगठन धुरी क कार्य कय रहल अछि मुद्दा जखन ब्राह्मण समाज के बात करब त एहि प्रकार के कोनो संगठन चिन्हित कयल जा सकैत अछि पूरा ब्राह्मण समाज क बाँधी में सक्षम हुआ।  एकर सिर्फ एक ही कारन अछि जे ब्राह्मण अपन जाति के उठावय कम पर गिरयावे ज्यादा अग्रसर अछि।  आब समय आवि चुकल ह आओर सब गोटे एक जुट भ जाऊ अन्यथा विलुप्त हो में कोनो कसर नहीं रहत। पिछुलगुआ बनैत स बढियां अछि जे अपन आत्मसम्मानक लेल अपन जाति संग जुडी कियाकि जनसंख्याके आधार पर त  मुट्ठी भर छी , जेना आहिस्ता आहिस्ता सरकार म अथवा सरकार के सुधी स बेदखल भय रहल छी ओहिना  हर तरहेँ स बेदखल भ जायब आओर आई आरक्षण के माध्यम स त काइल  सरक्षण के माध्यम स आहाँकेर आत्मसम्मान और अस्तित्व क चुनौती दैत। अपन प्रतिकिर्या जरूर साक्षात कराएब।

कौनो समाजकेर  तरक्की म अत्यंत योगदान होयत अछि जे सब कियोक मिलेकेर अपन समाज म पिछड़ल लोग केर उत्थान में समाज के प्रबुद्ध वर्ग अहम योगदान दय क लेल सम्प्रीत होइ मुद्दा ब्राह्मण आओर ओहिमे मैथिल ब्राह्मण होइ त कानी काटे में माहिर अछि एही कारन स ब्राह्मण समाज दिन पर दिन पीछेड़ रहेईल अछि हालाँकि दोसर जाति के ऊपर ई परिवेश भिन्न अछि बहुतो जाति आरक्षण के माध्यम स सरकारी -नौकरी पेशा म खूब तेजी स पहुँच रहल अछि।   बनिया, गुजराती आओर पंजाबी समाज के उन्नतिक मूल मन्त्र किछु अछि त अछि ओहि समाज केर लोग में एकता आओर अखंडता ईयाह ओहि समाज क कुशलता केर सर्वोपरि मापदंड मानल जायत अछि। यदि मैथिल ब्राह्मण सब कियो मिलके अपन समाज केर अग्रिम समाज के श्रेणी म ल जायके इच्छुक छि तहन मिलजुल केर आगू आउ समाज केर प्रति प्रतिबद्धता दर्शाबैके चेस्ता करू।  जय मैथिलि ब्राह्मण समाज।