सीबीआई इन दिनों UPA सरकार की सहयोगी को क्लीन चित बाटने में लगे हैं इनका शरूआत मानिये मुलायम सिंह यादव से किया और अब मायावती को हाथो हाथो क्लीन चित दे दिया। ना जाने अब इनको क्या संज्ञा देंगे पहले तो सुप्रीम कोर्ट तोता कह चुके हैं।
बुधवार, 9 अक्टूबर 2013
सोमवार, 23 सितंबर 2013
फिक्की बात:-कितनी हैरानी की बात हैं कि अनुमान मात्र पर एक आई. ए. एस. अधिकारी को निलंबित किया जाता हैं। जब लगभग तीन महीने तक न्याय पालिका और ही केंद्र सरकार से संतोष जनक जवाब न मिलता देख, अन्तः वह असहाय अधिकारी उस सूबे के मुख्यमंत्री से मिलकर माफ़ी मांगते उस कारण जिसमे उनकी कोई गलती थी ही नहीं, तदुपरांत उस अधिकारी का निलंबन ख़ारिज की जाती हैं। क्या जो अधिकारी अपने स्वाभिमान के साथ समझोता करके बिना अपराध की गलती मांगी हैं, अब वह इमानदारी और निष्ठा से काम कर पायेगी? और दूसरी सबसे गंभीर प्रश्न यह है की अपने राजनितिक हित साधने के लिए, क्या इमानदार और कर्मनिष्ठ अधिकारी को बलि का बकरा नहीं बनाया जा रहा हैं ?
इस बीच में जो मुज़फ्फर नगर में दंगा हुआ जिसमे उसी सूबे के मुख्यमंत्री का संवेदनहीनता और कई खामिया उजागर हुआ। क्या वे उनके लिए जनता से माफ़ी मांगगे और जनता उनको माफ़ कर देंगे? जरा सोचिये, मैं ज्यादा कुछ नहीं कह सकता क्यूंकि इन दिनों अभिव्यक्ति पर भी पावंदी हैं।
इस बीच में जो मुज़फ्फर नगर में दंगा हुआ जिसमे उसी सूबे के मुख्यमंत्री का संवेदनहीनता और कई खामिया उजागर हुआ। क्या वे उनके लिए जनता से माफ़ी मांगगे और जनता उनको माफ़ कर देंगे? जरा सोचिये, मैं ज्यादा कुछ नहीं कह सकता क्यूंकि इन दिनों अभिव्यक्ति पर भी पावंदी हैं।
रविवार, 22 सितंबर 2013
शनिवार, 21 सितंबर 2013
फिक्की बात:- "प्याज -प्याज , बेतवा ये प्याज नाही कोई ताज हो गया, जंहा देखो वंहा इसी का बात करते हैं, अरे हमारे ज़माने में लहसुन, प्याज लोग घर में भी नाही रखते थे" एक बूढी अम्मा ने कही अपने पोता से"
बड़े इतिम्नान से पोता ने जवाब दिया " अम्मा जी, अब ओ प्याज ना रहा, अब घर में नहीं लोग तिजोरी में इन्हें रखते क्यूंकि अब इनमें सरकार गिराने का दम-खम रखता हैं।"
शुक्रवार, 20 सितंबर 2013
फिक्की बात :-आज मेरी बात MTNL चेयरमैन के PRO से हुई और उन्होंने मेरी शिकायत को GM को फॉरवर्ड किया। GM साहेब का फ़ोन आया मेरे पास और कहने लगे आप को अगर तकलीफ हैं तो क्या आप PM को ही फ़ोन करेंगे ? जनाब, नीचे के ऑफिसर जब नहीं सुनगे तो कंहा जाया जाय ? मैंने उनको बताया मुझे लैप-टॉप में दिक्कत हुआ और मैं यंहा के कस्टमर केयर ऑफिसर से संतुष्ट नहीं हुआ, उसी वक्त मैंने Michel Dell को ईमेल किया, अगले दिन मुझे रिस्पांस आनी शुरू हो गयी लेकिन आपके पूरे सिस्टम को मैं लगभग १५ दिन से संपर्क कर रहा हूँ पर अभी तक समस्या का निदान नहीं हुआ। साहेब, जिस देश का प्रधानमंत्री ना ही सुनते हैं और ना ही बोलते हैं उस देश में और कौन सुनेगा? फिर भी हमें गर्व हैं कि हमारी हालत उतनी ख़राब नहीं जितनी अन्य एशियाई देशो का हैं। शायद यंहा के पब्लिक में दम ख़म इस तरह का हैं कितनी विषम स्थिति हो पर हार नहीं मानते है। जय हिन्द , जय भारत, जय आम आदमी !!!
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