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शनिवार, 12 जुलाई 2014


 बावन, कुकुर, हाथी अपने ज़ात केर खाती!!

वाकये ई कहावत यथार्थ अछि, आई जे ब्राह्मण के हाल अछि ओकरा लेल ब्राह्मण स्वंय जिम्मेवार अछि।  कारन जे आइयो ब्राह्मण प्रबुद्धता और विलक्षणता  म  इस्वर के कृपा से जन्मजात अव्वल प्राप्त होयत अछि लेकिन सदैव कनि व तनिक लाभ के लेल ओकर दुरपयोग करैत म अगुआ नतीजा आई हास्य पर अछि।  देश में जतेक जाति आओर वर्ग छैक ओकर समुदाय में कोनो -कोनो संगठन धुरी क कार्य कय रहल अछि मुद्दा जखन ब्राह्मण समाज के बात करब त एहि प्रकार के कोनो संगठन चिन्हित कयल जा सकैत अछि पूरा ब्राह्मण समाज क बाँधी में सक्षम हुआ।  एकर सिर्फ एक ही कारन अछि जे ब्राह्मण अपन जाति के उठावय कम पर गिरयावे ज्यादा अग्रसर अछि।  आब समय आवि चुकल ह आओर सब गोटे एक जुट भ जाऊ अन्यथा विलुप्त हो में कोनो कसर नहीं रहत। पिछुलगुआ बनैत स बढियां अछि जे अपन आत्मसम्मानक लेल अपन जाति संग जुडी कियाकि जनसंख्याके आधार पर त  मुट्ठी भर छी , जेना आहिस्ता आहिस्ता सरकार म अथवा सरकार के सुधी स बेदखल भय रहल छी ओहिना  हर तरहेँ स बेदखल भ जायब आओर आई आरक्षण के माध्यम स त काइल  सरक्षण के माध्यम स आहाँकेर आत्मसम्मान और अस्तित्व क चुनौती दैत। अपन प्रतिकिर्या जरूर साक्षात कराएब।

कौनो समाजकेर  तरक्की म अत्यंत योगदान होयत अछि जे सब कियोक मिलेकेर अपन समाज म पिछड़ल लोग केर उत्थान में समाज के प्रबुद्ध वर्ग अहम योगदान दय क लेल सम्प्रीत होइ मुद्दा ब्राह्मण आओर ओहिमे मैथिल ब्राह्मण होइ त कानी काटे में माहिर अछि एही कारन स ब्राह्मण समाज दिन पर दिन पीछेड़ रहेईल अछि हालाँकि दोसर जाति के ऊपर ई परिवेश भिन्न अछि बहुतो जाति आरक्षण के माध्यम स सरकारी -नौकरी पेशा म खूब तेजी स पहुँच रहल अछि।   बनिया, गुजराती आओर पंजाबी समाज के उन्नतिक मूल मन्त्र किछु अछि त अछि ओहि समाज केर लोग में एकता आओर अखंडता ईयाह ओहि समाज क कुशलता केर सर्वोपरि मापदंड मानल जायत अछि। यदि मैथिल ब्राह्मण सब कियो मिलके अपन समाज केर अग्रिम समाज के श्रेणी म ल जायके इच्छुक छि तहन मिलजुल केर आगू आउ समाज केर प्रति प्रतिबद्धता दर्शाबैके चेस्ता करू।  जय मैथिलि ब्राह्मण समाज।



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