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सोमवार, 23 फ़रवरी 2015



 सूट है या सुहानुभूत ?

 


जिस सूरत शहर के नामचीन उद्योगपति एक सूट के लिए चार करोड़ से ज्यादा खपत कर सकते, जँहा तक मेरा निजी अनुभव है  वँहा  के लोग मुफ्त में एक पैसा खर्च नहीं कर सकते क्यूंकि जिस कदर एक नामी ग्रामी उद्योगपति का व्यवहार मैंने देखा है जिनको तीस से चालीस लाख रुपैया का भुगतान करने के लिए पिछले एक साल से लगातार आग्रह करने के वाबजूद न ही रकम अदा कर रहे है और न ही नुकशान के भरपाई करने के लिए इच्छुक है। जँहा के लोगों के ऐसी प्रवृति है जो बेहद मनी माइंडेड है, क्या वे शौक के खातिर इतना खपत कर सकते है पर कर जाय तो  सवाल तो उठाना लाज़मी है क्यूंकि बोली लगानेवाले ज्यादातरलोग आयकर विभाग के निशाने पर पहले से रहे है? ऐसा तो नहीं है कि ये लोग इस बोली के जरिये प्रधानमंत्री का सुहानुभूति अर्जित करना चाहते हो जिसके बल पर अपनी काली कमाई का सरक्षण कर पाये ।  जो भी हो अधिकाधिक लोगों के इस तरह के कारनामों से काफी हैरान है और सबके जहन में एक ही प्रश्न उठ रहा होगा, क्यूंकि ये बोली अन्यत्र भी लगाये जाते पर गुजरात और उसमें भी सूरत को ही क्यूं चयन किया गया? बरहाल इसका सवाल अतिशीघ्र मिलना शायद मुमकिन न हो पर ज्यादा दिन इसको ढूढने में नहीं लगेंगे………………………!

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