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गुरुवार, 29 मई 2014



 अच्छे दिन वाकये में आनेवाले है !!


इस बार के चुनाव जँहा धर्मनिरपेक्ष के वकालत करनेवाले का हवा निकाल दिए वही जातिवाद के जरिये राजनीती के शीर्ष पर मौजूद आकाओ को भी लोगों ने बक्शा नहीं नतीजन बसपा, जदयू , सपा , राजद, सबको दहाई के भी अंक नसीब नहीं हुए जबकि बसपा अपनी खाता भी नहीं खुल पाये। कांग्रेस का तो लोगों ने ऐसा हाल किया कि कांग्रेस की कुर्सी भी गयी और विपक्ष में बैठने की औकाद भी गवांयी। असल में इसीको लोकतंत्र कहते है जँहा लोकशाही और तानाशाही के लिए कोई जगह नहीं दीखता, वाकये में इस चुनाव के परिणाम ने बड़े -बड़े सुरमा को धूल फाँकने पर विवश कर गया। कई ने तो अपना जमानत जब्त करावा लिए तो कई ने सिर्फ अपनी साख गँवा कर बिल में घुस गए। बड़े -बड़े बड़बोले की बोलती बंद हो गए  अब तो पता ही नहीं चलता है कि यही वे है जो बड़े -बड़े डिंग हाकतें थे।

मैंने अपने पिछले ब्लॉग में लिखा था की मोदी लहर नहीं सुनामी चल रही है जिनसे आज़ाद भारत के लोकतंत्र के कई नए अध्याय लिखे जायेंगे फिर भी यह अंशका मेरे जहन में भी जरूर था कि यदि अल्पसंख्यक वोट नहीं मिला तो ऐतिहासिक जीत को पाना संभव होगा पर अन्तः मुमकिन हुआ क्यूंकि मेरा अंदाज़ा था की लोग इस बार जात -पात से ऊपर उठकर देश के विकास के लिए मतदान करेंगे और वैसा ही हुआ। मोदी के सुनामी में बड़े-बड़े राजनीती के चट्टान कहे जानेवाले के अरमान ढह गए। नितीश, माया, शरद पवार, मुलायम, लालू, करूणानिधि जैसे दिग्गजों का मटिया पलित हो गए या यूँ कहिये कि कांग्रेस के गोद में बैठे सभी को कांग्रेस के समेत मोदी के सुनामी ने बहाकर ले गई। जो केजरीवाल, शीला दीक्षित के विरुद्ध चुनाव जीतने से इस कदर गड -गड थे कि मोदी के सख्सयित को समझते हुए भी नज़र अंदाज़ करने की हिमाकत की नतीजन न खुद का साख बचा पाये और न ही पार्टी के साख बचा पाये मसलन दिल्ली में खाता भी नहीं खोल पाये विडम्बना तो तब हो गया कि इनके ज्यादातर शीर्ष नेता के  जमानत जब्त हो गयी।

शायद मोदी के लिए अब संसद में कुछ ज्यादा जद्दोजहद करने के लिए कुछ रह नहीं गया क्यूंकि सिर्फ और सिर्फ वह अपना पूरा ध्यान विकास पर ही केंद्रित रखेंगे। हालाँकि इनके लिए उन्हें ईमानदार और कर्मठ सदस्य के जरुरत पड़ेंगे जिन्हे वे खुद ही तलाश कर तराश सकते है। नई सरकार के विरासत में जो भी मिलनेवाला है मोदी को इनसे निपटने के लिए काफी मसकत करना होगा क्यूंकि मंहगाई के त्रासदी के बीच इस तरह कई फैसले लिए जाना बाकि है जो किसी हद तक मंहगाई को बढ़ायी गई न कि मंहगाई को काम करेगी। अन्तः लोग मंहगाई से पहले ही त्रस्त होकर मोदी के तरफ निहार रहे है की मंहगाई से निजात दिलाएंगे वैसे में मोदी को कई कठोर फैसले इस तरह के लेने होंगे जो कंही न कंही लोगो को आहात करेंगे इसलिए अब मोदी अपने सूझ-बुझ का किस तरह से इस्तेमाल कर लोगों के ऊपर मंहगाई का मार दिए बिना इन सभी समस्याएँ को दरकिनार कर अच्छे दिन आने का दस्तक सुनाएंगे, इस पर भी सबके पैनी नज़र है।

दरअसल में कांग्रेस सरकार ने जाते -जाते कुछ इस कदर के फैसले कर गए जो जनता के हिट में कतई नहीं है। कांग्रेस ने गैस का कीमत बढाने पर राजी थी बस चुनाव के चलते इसे रोके थे इसी कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सरकार को लीगल नोटिस भी भेजा था परन्तु चुनाव के दौरान सरकार में बैठे आला अफसर हो या मंत्री इनको शायद आभास था फिरसे उनको मौका नहीं मिलने वाला है इसीलिए तो खामोश होकर आनेवाली सरकार के मत्थे मङने का काम कर गए।  दूसरी तरफ रेलवे ने भी यात्री किराये में भारी बढतोरी के सिफारिश अपने मंत्रालय को भेज रखे बस नई सरकार के गठन होते ही फैसला लिए जाना है। मोदी के लिए रेलवे मंत्रालय सबसे बड़ी चुनौती होनेवाली है क्यूंकि UPA-२ के कार्यकाल में ५-६ बार इनके मंत्री बदले गए थे, किराये में बेंतहा बढ़ोतरी के उपरांत भी सुरक्षा और सुविधा के नाम पर यात्री ठगा ही महसूस करते रहे जबकि इन्ही के मंत्रीको पद्दोन्नति के बदलें रिस्वत लेने का आरोप भी लगे है।  ऐसे में रेलवे मंत्रीके लिए योग्यता के साथ - साथ ईमानदारी भी जरुरी है ताकि इस तरह के आरोप से बचा जाय।

बरहाल देश के जनता को कांग्रेस के कहर की परेशान अभी तली नहीं है जबतक नई सरकार के द्वारा राहत के अनेको-अनेक कदमें यथाशीघ्र नहीं उठाई जाती है।  एक तरफ असुरक्षा जो लोगों के दिलो-दिमाग में पैठ बना लिया है उसके लिए कई कारगर कदम उठाने है और इसकेलिए सबसे पहले देश से बंगलादेशी को बेइज्जत निकालना होगा क्यूंकि बंगलादेशी ने देश के तमाम शहरों में तकरीबन पचास फ़ीसदी क्राइम को अंजाम देते है अगर इनको इन शहरों से भगाया जाता है तो शहर में पचास फ़ीसदी क्राइम में निश्चित कमी दर्ज़ होगी। अभी तक कांग्रेस हो, आआपा हो अथवा अन्य पार्टी वोट के लिए इनके हिमायत किया करते थे और इनको अपना सरक्षण देते रहे थे पर लोगों के लिए अच्छा होगा कि इन बांग्लादेशी को बिना बिलम्ब इस देश से बाहर का रास्ता दिखाया जाय ताकि इनको दिए जानेवाले सहूलियत देश के जनता को मिलें और देश जनता को इनके द्वारा रोजमर्रा के आतंक से राहात मिलें।
सुरक्षा के संदर्भ में सबसे पहले पुलिस सुधार कानून को लागु किया जाना अतयंत आवश्यक है, जिसका खाका पहले सी तैयार है क्यूंकि पुलिस को जब तक जवाबदेही और उनके काम काज को लेखा -जोखा के लिए निगरानी कमिटी नहीं बनाई जाती है तब तक लोगों के जहन से  असुरक्षा का भावना निकालना कदापि संभव नहीं है।

आखिकार जनता ने अपनी वोट को जिम्मेवारी और जवाबदेही के साथ प्रदान की है इसीलिए सरकार का अब दायित्व बनता है कि सरकार जनता के सपने को साकार करे और किये गए सभी वदाओं को पुरे करने के लिए अभी से कटिबद्ध हो जाये ताकि जनता को दिलाशा मिले की सचमुच में अच्छे दिन आने वाले है।

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