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शनिवार, 7 जून 2014


 

समाजवादी सरकार में समाज की ही अस्मत खतरे में!

उत्तर प्रदेश में महिलाये व आधी आवादी सुरक्षित नहीं है हालाँकि पुरे देश का कमोबेश यही हाल है पर हद तो तब हो जाता है जब प्रदेश के सबसे कदावर नेता को ये कहने से थोड़ा भी संकोच नहीं होता है " क्या बलात्कार का सजा  फांसी देना सही है?, अपने लड़के है लड़के से गलती हो जाता तो क्या उनको फांसी पर लटका दोंगे यदि केंद्र के सत्ता पर काबिज़ होंगे तो ऐसे कानून का संशोधन करेंगे।" जनाब आप तो प्रदेश के बुजुर्ग नेताओ में से एक है और आपका ही सपूत है जो प्रदेश के मुख्या है ऐसे में  इस तरह का बयान से प्रदेश के लोगो में हताश होना स्वाभिक है जबकि इस तरह के कथन सुनकर बहसी और दुराचारी लोगो के उत्साह में चार चाँद लगना लाज़मी है। फिर भी आप ने जो कह दिया सो कह दिया न आप को इसके लिए मलाल और न ही शर्म अन्यथा अभी तक आप सार्वजानिक रूप से  अपनी गलती का इजहार करके माफ़ी मागने का कृपा करते पर आपके शब्दावली में शायद माफीनामा का कोई शब्द नहीं। हालाँकि आपके निरथर्क बयान का ही असर है इसे माने अथवा न माने परन्तु उस बयान का परिणाम ही है जो एक तरफ प्रदेश के महिलाये को सूझ नहीं रहा है कि आखिर अपनी अस्मत को तार-तार होने से कैसे बचाये है? वहीँ दूसरी तरफ अस्मत लूटनेवाले को मानों खुली छूट मिल गया हो और इसीलिए तो रोजाना महिलाये अथवा किशोरी के अस्मत लुटे जाते है  पर आपके सपूत मानिये मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के कानो में जू नहीं रेंगते है। समस्त विश्व आपके संवेदनहीनता पर अफसोश जता रहे है और अपने नागरिक को सावधान कर रहे है कि भारत जाने से बचे। बदायूँ  के घटना से कि प्रदेश के लोग आहत में है ब्लिक देश और देश से बाहर के लोग भी सन्न है कि आखिर ये क्या हो रहा है ? यह सिर्फ मानसिक विकृति का नतीजा है अथवा सरकार के आराजकता के कारण समाज में बढ़ रहे दबंगई का नतीजा है ? सचमुच में कारन जाने बिना ही इनका समाधान ढूढना अत्यंत आवश्यक है क्यूंकि इसका उनमूलन अगर जल्दी से नहीं किया जाता तो निश्चित ही इस तरह के वारदात हमारे समाज के संरचना को तहश -नहस कर देगा।  इसीलिए तो यूनाइट नेशन के अध्यक्ष को भी इसके लिए भर्त्सना करना पड़ा जबकि नेताजी के द्वारा दिए गए बयान पर कटाक्ष करने से नहीं चुके।  वाबजूद इस तरह के निंदा पुरे विश्व में हो रहे है पर प्रदेश के सरकार अपनी गिरबान में झाकने के बजाय मीडिया के ऊपर लाछन लगाने में व्यस्त है क्यूंकि सरकार को गलतफहमी हो चला है कि मीडिया चढ़- बढ़ा कर प्रदेश के घटना को दिखा रहे है जबकि अपनी प्रशाषण को दुरस्त का जहमत अभी तक नहीं उठाई।

वास्तविक में यदि मीडिया के नज़र नहीं पड़ी तो सरकार और प्रशाषन मामूली घटना बतलाकर यूँही नजरअंदाज कर देते है और यदि मीडिया के नज़र से नहीं बच सके तदुपरांत मीडिया इसके लिए जद्दोजहद करके पीड़िता  के लिए इंसाफ की सिफारिश करते है, वैसे में सरकार के तरफ से दो- पांच लाख का सहयता राशि का घोषणा करके चुप्पी साध लेती है।  यदि उत्तर प्रदेश के पुलिस के काम काज का लेख -जोखा करे तो शायद यह कहना कतई गलत नहीं होगा कि देश के सभी प्रदेश के मुकावले फिसड्डी ही है क्यूंकि उनके काम काज में राजनीती दखलंदाज़ी इस कदर हावी है कि पुलिस कुछ जरुरत के फैसले भी अपने हुक्कुमरनो से पूछकर लेती है अपितु उनके सामत आनी सुनिश्चित है ऐसे में पुलिस के पास एक ही विकल्प है कि अपने आकाओं को सदेव खुश रखे। हालाँकि फिलहाल सरकार और उनके नेता मीडिया के ऊपर जोरदार हमला कर रहे है ताकि मीडिया प्रदेश में अपराधिक कारनामे को दिखाने से परहेज़ करे।

दरसअल  में जज और वकील का बलात्कार दिन दहाड़े किये जाते है जो आम आदमी को झकझोरने वाली ही खबर कही जा सकती है। यद्दीप कुछ लोग का मानना ये भी है कि इनदिनों उत्तर प्रदेश सिर्फ एक ही जाति के लिए उत्तम है जिसे सरकार के तरफ से कोई पावंदी नहीं है और वह अपनी दबंगई को निसंकोच बिना किसी भय का अपराधिक नए -नए कारनामे पेश कर रहे है जबकि प्रशाषन को भी हिदायत दी गयी है कि इनके दबंगई के खिलाफ कोई भी शिकायत मिलती है तो बिना पड़ताल किये खारिज कर दें ऐसे में पुलिस वाला तमाशबीन बनके सब कुछ देखने को बाध्य है।

फिलहाल केंद्र सरकार में गृह मंत्री उसी प्रदेश के व्यक्ति है और सरकार के सभी हरकतों से भलीभाँति वाक़िफ़ है। इसीलिए प्रदेश सरकार को चाहिए की कानून व्यवस्था को अतिशीघ्र दुरुस्त करे नहीं तो केंद्र सरकार उनके खिलाफ शख्ती  कर सकते है जो गृह मंत्री का पूर्णतः अधिकार क्षेत्र में आते है। वायदबे केंद्र सरकार चुप्पी   साध कर प्रदेश में हो रहे सभी प्रकार के जातियता और लचर कानून व्यवस्था के ऊपर नज़र गड़ाये हुए है और आनेवाले दिनों में कई प्रकार के कारगर कदम उठाये जा सकते है। जब तक देश के सभी नागरिक खुदको सुरक्षित नहीं महसूस करेंगे तबतक अच्छे दिन आने का परिकल्पना करना कदाचित उचित नहीं होगा।  अन्तः केंद्र सरकार बिना विलम्ब के प्रदेश सरकार के ऊपर अत्यधिक दबाब बनानी चाहिए ताकि प्रदेश के कानून व्यवस्था में सुधार हो और अपराधी के जहन में डर का गुंजाईश हो।

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