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सोमवार, 6 अक्तूबर 2014

स्वच्छ भारत किसकी जवाबदेही ?


बड़े -बड़े मंत्री हो या बाबुओ,  प्रधानमंत्री  के इस जन अभियान के आध में खुदके लिए अच्छी खाशी पब्लिसिटी बटोरने में लगे है नतीजन १५ मिनट्स के इस अभियान के लिए रंगारंग  कार्यक्रम प्रायोजित कर रहे है जिसके कारन लोगो के जेब पर झाड़ू चला रहे है। जिस कदर मोती रकम झाड़ू खरीदने के लिए खर्च किये जा रहे है जो कि देश के जनता का मेहनत की कमाई है, लाइव ब्राडकास्टिंग करने के लिए पहले से  मीडिया के टीम को बुलाई जाती है आखिरकार लाइट, कैमरा और एक्शन के बीच में मंत्री हो या बाबुओ मुस्किल से पंद्रह मिनट्स अपने हाथ में झाड़ू थामकर फोटो अथवा वीडियो शूट कराते है औ र बड़ी सी गाड़ी में बैठ कर वंहा से निकल लेते है ।  आखिर बात यह उठती है कि अगर स्वच्छ भारत के अभियान को काया कल्प देश के आम आदमी को ही करना है तो इस तरह का प्रचार -प्रसार करना कितना औचित्य है या  इस तरह के ढकोशला की क्या आवशकता है ? बिलकुल नहीं , क्यूंकि इन प्रचार -प्रसार में देश के लोगों का ही जेब को ही सफा किये जायेंगे ।

मानिए प्रधानमंत्री के इस पहल पर बेशक उंगली उठाने का गुंजाईश तनिक भी नहीं है क्यूंकि इस जन अभियान के प्रति जो उनके सोच है वे देश के समर्पित व अभूतपूर्व है और उनके यह प्रयास भी अतयंत  प्रशंशिय है पर उनके इस जन अभियान के प्रति उन्हीके बाबुओ और मंत्रीयो के समर्पण पर लोग का विस्वाश हरगिज़ नहीं है क्यूंकि स्वच्छ भारत के अभियान के लिए जो इच्छा शक्ति की आवश्यकता है वह किसी भी बाबुओ और मंत्रीयो में नहीं देखे जा सकते है और यदि इस अभियान से जुड़े है तो सिर्फ अपने स्वार्थ और मज़बूरी के चलते जो कतई इस अभियान कामयाब नहीं बना सकते है अर्थात हमारे प्रधानमंत्री जी को चाहिए कि सबसे पहले इन अभियान से जुड़े हुए निकटम लोगो को प्रेरित करे क्यूंकि वे अगर इस अभियान में सलग्न है तो मुफ्त में देश का सेवा नहीं कर रहे ब्लीक ये उनका कर्तव्य में से ही एक है जिसको वे जवाब देहि के साथ पूरा करे।

देश में ग्रामीण क्षेत्र में वास्तव में कोई ऐसा संस्था नहीं है जो स्वच्छता के प्रतिक हो पर शहरी क्षेत्र में नगर निगम एक ऐसा  संस्था है जिनका प्रमुख काम होता है सफाई का पर वे सचमुच में थोड़े भी प्रयासरत होते तो आज हमारा शहर कचड़े के ढेर पर नहीं बैठे होता। प्रधानमंत्री को चाहिए एक ऐसी पालिसी बनाये जिसके अंतर्गत नगर निगम के काम - काज के ऊपर निगरानी रखी जाय क्यूंकि शहर के गन्दिगी के लिए अगर कोई बहुत बड़ा कसुरबार है तो वह नगर निगम के अधिकारी, पार्षद और कर्मचारी जो अपने कर्त्वय से विमुख है। जिस देश के  नगर निगम में भ्रष्टाचार अपने सोलह कलाओं के साथ व्याप्त हो उस देश के गन्दिगी को कौन सफा करेंगे? अगर देश को स्वच्छ बनाना है तो सबसे पहले नगर निगम को स्वच्छ बनाना होगा जो सरल नहीं है।  सरकार चाहती है सब कुछ जनता खुद करे यह हरगिज़ मुनासिब नहीं है अगर देश के जनता अपने मेहनताना का एक बड़ा हिस्सा सरकार को कर के रूप में देती है इसीलिए कि सरकार देश के जनता को बुनयादी सुबधाएं मुहैया कराये।  सरकार वास्तव में चाहती है कि स्वच्छ भारत बनाये तो सबसे पहले व्यवस्था को दुरुस्त करे इसके लिए नगर निगम और प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड को जवाब देहि बनाये क्यूंकि देश के ७० फीसदी गन्दिगी के लिए ये दो ही संस्था सीधे तोर पर जिम्मेवार है क्यूंकि ये अपना काम-काज  पूरी ईमानदारी से नहीं करते जबकि ३० फीसदी कसुरबार देश के वे जनता है जो गन्दिगी फैलाती है। एक तरफ देश के जनता को प्रेरित करके गन्दिगी को रोकी जा सकती  है जबकि सिविक बॉडी को जवाबदेही बनाने की जरुरत है ताकि वे अपने कर्तव्य का निर्वाह पुरे निष्ठा और श्र्द्धा से करे।

दरअसल में गन्दिगी से अगर सबसे ज्यादा कोई प्रभावित कोई होता है तो हम आम आदमी ही है जो इस कारन से अनेको बीमारी का शिकार होते है , साथ ही पुरे विश्व के पतल पर हमेही इनके लिए शर्मसार होना पड़ता है। अन्तोगत्वा  जिम्मेवार कोई भी हो पर स्वच्छ भारत का अभियान हम सबके लिए जरुरी है क्यूंकि स्वच्छ भारत ही हमें न कि पुरे विश्व में सम्मान दिलाएंगे ब्लीक इनके कारन से फैलानेवाली बीमारी से भी बचाएँगे। इसीलिए आओ चले भारत को स्वच्छ बनाये, गांधीजी के सपना को साकार करे ।

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