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गुरुवार, 13 नवंबर 2014


 केजरीवाल आखिर चुप क्यूँ है ?



केजरीवाल के बेटी को लेकर जिस कदर का खबर मीडिया में आ रहे है इसके लिए केजरीवाल को कठोर करवाई नहीं करना चाहिए उनके खिलाफ जो उनकी बेटी के बारे में अभद्र टिप्पणी करते है क्यूंकि किसी भी महिला के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना गैर कानूनी है ऐसे में केजरीवाल  टिक्का टिप्पणी करने वाले के खिलाफ कुछ नहीं करना और माफ़ी दे देना क्या उनकी राजनीती का हिस्सा ही तो नहीं जो पुरे सुनिजीत तरीके से अंजाम दिए जा रहे है ? सवाल तो उठेंगे ही क्यूंकि अभी तक राजनीती के हिट के लिए कई बार इस तरह के काम किये जो लोगो के सोंच से परे है। इन्होने राजनीती में बढ़ते वंशवाद परंपरा का कत्तर विरोधी खुदको मानते थे पर अपने दो साल की  राजनीती के विरासत को संभालने के लिए नाबालिग बेटी को राजनीती में ले कर आना  और सक्रिय करना भी लोगो को अचंभित करता है इससे एक बार फिर अपने जुबान से फिसल गए केजरीवाल। फिलहाल लोग उनके किसी भी बात पर यंकी नहीं करना चाहते है इसी कारण हतोत्साहित हो कर कुछ इस तरह का अनाप -सनाप हरकतें तो जान बूझकर नहीं कर कर रहे ताकि जनता का ध्यान आकर्षण कर सके ? लोगों संदेह और लोग चाहते की अब भी अपने परिपक्कता का उदहारण दे पर उनके हरकतें देखकर तो लगता है कि ऐसा कभी भी मुमकिन नहीं है और आने वाले दिन में कुछ इस तरह का कारनामा करते दिखंगे जो लोगो को अचरज में डालेंगे।

दरअसल में केजरीवाल की राजनीती फिलहाल दो राहे  पर खड़ी है, एक रास्ता जो सीधे उनको खोये हुए शाख को पुनः जीवित करने का काबलियत रखता है जबकि दूसरा रास्ता इनके राजनीती के भविष्य को गर्त मिला सकता है। केजरीवाल अपनी राजनीती के अनुकूल रास्ता को चिन्हित करने में लगे जो सीधे उन्हें फिर से सत्ता पर काबिज कर दे परन्तु उनका यह लालसा उनके ऊपर इस कदर प्रबल  है कि उचित और अनुचित दोनों को तिलांजलि देकर सिर्फ सत्ता के उस कुर्शी पर केंद्रित कर रखे है। बिलकुल  उसी भांति जैसा अर्जुन को  पंछी के आँख नज़र आते थे उसी तरह इनदिनों केजरीवाल को सिर्फ दिल्ली की गद्दी नज़र आते है अन्यथा बिना विलम्ब के अपनी बेटी के ऊपर टिका टिप्पिणि करनेवाले के खिलाफ कठोर कदम उठाते है क्यूंकि जो बाप अपनी बेटी की अस्तित्व की रक्षा नहीं कर सकते उनसे देश की जनता क्या अपेक्षा करेगी ? आखिरकार केजरीवाल जी अब भी तो  कुछ कीजिये……… !!


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