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मंगलवार, 29 अक्तूबर 2013

 जरा सोचिये:- 

शीला दिक्षित इन दिनों प्याज के खरीद परोख्त में काफी रूचि ले रही, यदि इस बार चुनाव में पराजित होगी तो तो शायद प्याज के थोक विक्रेता का काम शुरु कर सकती हैं इसमें थोड़ी भी संदेह नहीं हैं पर ये प्याज की कृपा के ऊपर ही निर्भर है। मैडम, जितनी  प्याज के दामो में बढ़ोतरी के लिए चितिंत हैं , उतनी  ही अन्य वस्तु के लिए भी चितिंत होती तो शायद प्याज के आशु में नहाने का डर नहीं होता , खैर दिल्ली की जनता काफी समझदार है, और अपना प्रतिनिधि चुनने में थोड़ी भी दिक्कत नहीं होनी चाहिए। जरा सोचिये एक प्याज जब सरकार गिराने का दमखम रखता हैं नहीं  तो सरकार को इनसे डरने क्या जरुरत हैं। क्या हममें  ओ दमखम नहीं हैं जिस कारण  सरकार हम से डरे और कोई भी अनुचित काम करने से पहले कोटि -कोटि बार सोचे  ताकि उनकी आस्था और सम्पर्ण में थोड़ी सी भी असमंजसता दिखाई ना पड़े?

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