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शनिवार, 14 दिसंबर 2013


क्या कांग्रेस पार्टी की बौखलाहट में उनकी हताश नज़र आ रही है ?

क्या UPA विखरने के कगार पर तो नहीं हैं, जिस कदर UPA के घटकदल में सुगबुगाहट हैं इन चारो  राज्यो में चुनाव के पश्चात इससे यही अंदाजा लगाया जा सकता हैं। कांग्रेस ने  आवेश में आकर  कुछ ऐसा तो नहीं कर देगी जिससे देश कि जनता बरसो झुंजती रहेगी।  अपनी हार से सबक़ लेने के वजाय कोंगेस अपनी उस सोंच पर आत्मचिंतन  छोड़ कर फिर से टकराव कि राजनीती को हवा दे रही हैं। जहाँतक सरकार कि संवेदना को देखे तो ऐसा प्रतीत होता हैं कि सिर्फ़ किसी भी तबका के लिए जो इनका नज़रिया हैं वे सिर्फ दिखावटी जिसके बदोलत उस तबके के सहानुभूति के बदले में वोट हासिल करनी चाहती अन्यथा मुज़फ्फरनगर दंगा पीड़ित की चीख सुनाई तो नहीं देती। आज मुज़फ्फरनगर दंगा पीड़ित को जिस तरह सहायता के नाम पर खानापूर्ति करी जा रही हैं, इसकी का नतीजा हैं कि चालीश से अधिक बच्चे ठिठुर कर दम तोर दिए क्या उसको बचाये  नहीं जा सकते थे पर इसके लिए ना  केंद्र सरकार औरना ही राज्य सरकार अपनी अपनी जवाबदेहि लेन को तैयार हैं पर ज्यो ही दंगा कि आग भरके  यही  सत्ताधारी पार्टी सियासी रोटी सेकने में थोड़ी भी देरी नहीं दिखाई पर आज उनके दर्द से क्यूँ मुख फेर रही हैं ? इसका तो जवाब सरकार दे ना दे पर जनता को सब पता हैं।
क्या यह उपयुक्त समय हैं जो हिंसा विरोधी बिल सदन में रखी जा रही हैं , क्या सत्ताधारी पार्टी वोट को धुर्वीकरण के लिए तो ही इस तरह का बिल नहीं  ला रही है, सत्तधारी पार्टी हताश होकर दो समुदायो के बीच में जो सौहार्द को बिगारने में तो नहीं लगी हैं ? इस तरह के कई अनसुलझे  सवाल का भी जवाब इस देश को जनता चाहेगी।  सरकार जो बैसाखी के सहारे चंद महीने तक जीवित हैं क्या इस तरह के बिल लाने में इतनी जल्दबाजी क्यूँ दिखा रही हैं क्या सत्ताधारी पार्टी ने सुनिश्चित करली हैं इस तरह के विवादित बिल ही इनके लिए संजीवनी का काम करेगी, कांग्रेस ने जो इस कार्यकाल में अपनी तानासाह और तानासाह सरकार देने के लिए जानी  जाती थी आज अचानक इतनी डफ्फेन्सिव कैसे हो गयी, ऐसा तो नहीं कि उस आंधी का आने आहत  नहीं सुनाई दे रही हैं जिसमे खुदको नस्तेनाबूत देख रही हो।  कुछ ऐसे सवाल पनप रहे हैं देश और पार्टी दोनों के जहन में जिसका जवाब ना  कांग्रेस पार्टी ढूंढ पा  रही हैं और ना ही देश।
बरहाल, कांग्रेस  पार्टी अपनी खोई होई ताक़त को संचय करे ताकि आगामी आम चुनाव के बाद फिर कोई पश्चातवा ना हो  और ये जितनी जल्दी जान ले कि जनता जनार्दन है तो आप है इसलिए इस तानासाह रवैया को तिलांजलि देकर  जनता के मुलभुत समस्या का निदान करे तो आपका का भी बेहतर होगा और इस देश की जनता का भी। क्यूंकि आपका ये बखोलाहट आपको ले डूबेंगी और धीरे -धीरे आपके घटक दल तिनके कि तरह टूटते जायेंगे, आखिर इस देश में उगते हुए सूरज को पूजा जाता हैं

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