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सोमवार, 23 दिसंबर 2013


अब होंगे पुरे सारे अपने सपने!!


कल दिल्ली के फ़िज़ा में आम आदमी का गुल्फ़ाम महेकगी, हर तरफ आम आदमी का ही जलवा होगा, शहर -ए - तमाम इनका जो गवाह बनने जा रही है ,  आखिर आम आदमी का पुरे होंगे सारे सपने जो दिल्ली के जनता ने  दिल्ली के सरकार के लिए देखे थे  वही लोग जो जमुहुर्रियत में आस्था रखनेवाले हैं  और एक अर्शे से देखते आ रहे हैं। फिर भी  यह दुबिधा अब भी मन में घर बना कर बेठा हैं दिल्ली वासी के जहन में कि वाकये दिल्ली को नई वही सरकार मिलने जा रही हैं , क्या सचमुच में अब उनके सब सपने साकार होंगे ?
एक तरफ जँहा दिल्ली में आम आदमी के आलाप करनेवाली आप की सरकार बनने जा रही पर इन  पार्टी के लिए दिल्ली के जनता  के उम्मीद पर खड़े उतरना, हिमालियन एंड हरक्यूलियन टास्क से कम नहीं हैं। दिल्ली के जनमानस को  पिछली सरकार के प्रति जो आक्रोश थी उसकी नतीज़ा हैं कि आप  आज सरकार बनाने  जा रही हैं जिनकी पहली वरसगाँठ अभी कुछ महीने पहले ही मनाये गयी हैं।

जंहा एक तरफ कांग्रेस और बीजेपी के सियासी आक्रमण का जवाब "आपको" ढूढनी  होगी वही दूसरी तरफ दिल्ली के जनता से किये गए वायदा पुरे करने होगे जो आप ने इस चुनाव के दौरान  किये थे। अरविन्द केजरीवाल जो राजनितिक धरातल पर हाल में ही अपने कदम रखे हैं, इनके लिए दिल्ली को एक ऐसी सरकार देना जिसकी पहली प्राथमिक्ता यहाँ के आम आदमी होगी, उनके लिए बहुत ही कठिन होगा।  दिल्ली, किसी भी राज्य के मुकावले यंहा खाश आदमी के तादाद इतने  हैं कि राज्य के ३०  प्रतिशत से ज्यादा सुरक्षा बल इनके सुरक्षा में दिन- रात लगे रहते हैं ऐसी स्थिति में अरविन्द केजरीवाल कितना आम आदमी के सुरक्षा की  गारंटी से सकते हैं ? इन बातों  से इत्तफ़ाक़ रखने वाले बहुत कम ही होगे। इसलिए आम आदमी दिल्ली में खुदका सुरक्षा अरविन्द केजरीवाल के  वजाय ऊपर वाले के भरोषे  करे तो शायद बेहतर होगा क्यूंकि दिल्ली में पुलिस तंत्र  केंद्र के गृह मंत्रालय के अंदर आती हैं इसपर  दिल्ली सरकार का कोई नियंत्र नहीं हैं।  इसलिए सुरक्षा की अपेक्षा अरविन्द केजरीवाल से करना सरासर बेईमानी होगी। 
दूसरा अहम् मुद्दा हैं मंहगाई,  चाहे बिजली, पानी हो या रोजमर्रा के जरुरत के सामान हालाकिं आपके चुनावी एजेंडा में इनसे निजात दिलाने का भरोषा तो दिया गया हैं पर यंकी अभी भी नहीं की जा सकती कितना भी करले बिजली का दाम ५० प्रतिशत कम करना हैरतंगेज़ कारनामा होगा जो कतई सम्भव नहीं हैं। यदि रोजमर्रा की जरुरत के सामान कि बात करेंगे तो ये भी अभी मुमकिन न  हैं इस प्रतिकूल परस्थिति में जब   पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के  दाम में बेइंतहा इजाफा हो रही हैं। अगर सरकार चाहेगी तो पानी के बिल में थोड़ी बहुत सब्सिडी दी जा सकती, पर इसके संदर्भ में कुछ कहा नहीं जा सकता हैं। 
भर्ष्टाचार पर सरकार संज्ञान लेने में थोड़ी भी देर नहीं करेगी क्यूंकि आनेवाली सरकार इसी मुद्दे के बलबुत्ते हो सकता हैं अपनी सरकार की छवि पिछली सरकार की छवि से भिन्न श्रेणी में लाने में कामयाब हो सकती हैं। दरशल में सरकार पहले का ६ महीने अनुकूल हालत  रह सकता हैं पर बाद में कांग्रेस जो इनको बाहर से समर्थन दे रही हैं इतने रोड़े अटकाएगी, जिसे हटाना आप के लिए  कभी भी आसान नहीं होगा। 
आप तो सरकार बनाने में जितनी कठनाई का सामना नहीं  करनी पड़ी हैं उतनी ही  परेशानी का सामना उनको सरकार चलाने में होनेवाली हैं, बीजेपी जो संख्या के आधार पर आप से बड़ी पार्टी हैं वे आपको कभी कोई मौका नहीं छोड़ंगे  बखिया उधरने में , वही कांग्रेस जो इन्हे बाहर से समर्थन तो दे रही हैं बस आपकी काबलियत परखने के लिए या आपके चकाचोंध को जनता के नज़र से ओझल करने के लिए, थोड़ी भी संदेह नहीं हैं कि दोनों स्थितियों  में सरकार गिरबाने से नहीं चुकेगी चाहे सरकार ठीक ठाक चल पाये अन्यथा न चल पाये। जनता जो आज सरकार बनाने के लिए जो आप के तरफ से किये गए सर्वे में  बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और अपनी हामी भी भरी पर आनेवाले दिनों में उनके सपने अधूरे रह जाते हैं तब  क्या जनता आप के साथ  वही सुहानभुत्ति दिखाएगी जो आज दिखा रही हैं?
 शायद नहीं, इसलिए अरविन्द केजरीवाल के लिए दिल्ली का ताज़ कांटे नहीं खंज़रो से भरी होगी इसे पहनने से पहले इनके जख्म (घाव) का आकंलन करने का यही उचित समय हैं बाद में तो सिर्फ जख्म को गिनने और उसके उपचार में ही समय व्यतीत होना है।  

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